दुआ है के सबको ख़ुदा शाद रखें।
क़यामत तलक उनको आबाद रखें।
दुआ है के सबको ख़ुदा आग ही दे।
परेशान लोगों के लब को हँसी दे।
दुआ है मरीजों को जल्दी सिफ़ा हो।
जो बेजुर्म कैदी है जल्दी रिहा हो।
जो सुखी है कलियाँ सर सब्ज़ कर दे।
तु हर एक दामन मुरादों से भर दे।
जो मुफ़लिश है उनकी ग़रीबी मिटा दे।
जो कम ईल्म है उसको आलिम बना दे।
जो बेनूर है उनको बिनाई दे दें।
सभी गूंग लोगों को गोयाई दे दें।
जो बहरे है उनको बड़ा दर अता हो।
जो मकरूज़ है उनका कर्ज़ा अदा हो।
जो बे आल है उनको औलाद बख़्शे ।
हमें काबिलियत ख़ुदा दाद बख़्शे।
जो प्रदेश है वो घर लौट आए।
मशाफ़त से अहले सफ़र लौट आए।
वो अपनों से अपना या ग़ैर सबकी।
दुआ है हमेशा रहे ख़ैर सबकी।
बदल दे मुसलमां की तक़दीर मौला।
अता हो ज़बानो को तासीर मौला।
मुसलमानों कुरआन सुन्नत की ज़िद हो।
उखूवट के परचम तले मुत्ताहिद हो।
मुसलमान हर जंग में सुर्खरू हो।
हिरा और खारिंद के सारे अदु हो।
जो बद है वो सब नेक हो जाए मौला।
मुसलमां सभी एक हो जाए मौला।
खुदाया गुलामों को आज़ाद कर दे।
उन्हें अपने मुल्कों में आबाद कर दे।
तेरी रहमतों की सभी पर नज़र हो।
खुदाया हमारी दुआ में असर हो।
तेरा खौफ हो सिर्फ़ अपने दिलों में।
तेरा ज़िक्र हो आम सब महफिलों में।
दुआ है के सर पर तेरा साइबां हो।
मेरे भी तो होठों पर कलमा रवां हो।
खुदाया हमारी दुआओं को सुन ले ।
हमें अपने महबूब बंदों में चुन ले।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें